नोटबंदी के बाद अब अमेरिका से भारतीय लौटेंगे तो भला भारत का ही होगा

नोटबंदी के बाद अब अमेरिका से भारतीय लौटेंगे तो भला भारत का ही होगा

नोटबंदी के बाद अब अमेरिका से भारतीय लौटेंगे तो भला भारत का ही होगा एक छोटी सी ख़ुशख़बरी मोदीजी नेदी है कि पेट्रोल के दामों में पाँच रुपये की कमी कर दी है। अब जो लोग रोज़ानासौ किलोमीटर गाड़ी चलाते हैं वे बीस रुपया रोज़ बचा सकते हैं। कारवाले ज़्यादा बचा सकते हैं। यानी छह सौ रुपये महीने के बचा सकते हैं।
इसी तरह से महँगाई को कम करते चले जाना है, तभी आम आदमी चैन की साँस ले सकते हैं। नोटबंदी होते ही सबसे पहले किसानों ने सब्जी और अनाज के दाम बहुत ही ईमानदारी से कम कर दिये हैं केवल किसान ही देश का सबसे ईमानदार इंसान है, किसान अपना सबकुछ लुटा देता है लेकिन आम आदमी का साथ हमेशा देता रहा है, आज़ादी के पहले से ही किसान ईमानदारी से जिया है।


बाक़ीय कुछ सोने चाँदी की दुकान वाले, कुछ रियल इस्टेट वाले, कुछ शेयर बाज़ार वाले, कुछ महँगे स्कूल के फ़ीस वाले, कुछ महँगे अस्पताल वाले, ये सारे के सारे महाशय एक नंबर के बेईमान और बट्टेबाज़ होते हैं, इनकी गेंडे की चमड़ी पता नहीं कब इंसान की चमड़ी बनेगी। हमें मोदीजी पर पूरा भरोसा है कि एक-एक कोकरके मोदीजी ऐसा सबक सिखाएँगे कि इन भ्रष्ट लोगों की आत्मा तक काँप उठेगी। आज की तारीख़ में भी सौ रुपये का नोट तो दस रुपये के नोट से भी बदतर हो गया है, सौ रुपये निकालते ही जल्दी से ख़र्च हो जाता है,जिस दिन ये सौका नोट सुबह से शाम तक चलेगा उस दिन लगेगा कि वाक़ई में रामराज्य आ गया है। इधर यूपी में जैसे ही आदित्यनाथ सीएमबने हैं सारे भारत में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है, लोग जो दो मोबाइल फ़ोन रख रहे हैं एक खोलते ही मोदीजी की फ़ोटो आरही है दूसरा फ़ोन खोलते ही आदित्यनाथजी की फ़ोटो आ रही है। आदित्यनाथजी ने यूपी में सरकारी अधिकारियों को संपत्ति का ब्यौरा देने की बात कही है, जिस दिन इस देश से ब्यूरोक्रेसी चली जायेगी उस दिन से यह देश सच में आज़ाद महसूस करेगा। मैं आपको इंसान के शरीर की हालत बतलाता हूँ, हमारे मुँह को स्कूल की महँगी फ़ीस और डॉक्टरों की फ़ीस ने कस के बाँध दिया है, हम गूंगे हो गये हैं। हम इनके गुलाम हो गये हैं, हमारे पैर को ब्यूरोक्रेसी ने कसकर पकड लिया है, हमें कुछ भी करने की इच्छा होती है, ब्यूरोक्रेसी कुछ करने ही नहीं देती है, हमारे पेट्रोल सेगाड़ी चलती रहे
इसके लिएहम गुलामी की नौकरी करके पेट्रोल के पैसे कंपनी से लेते हैं, इस तरह हमारा सारा ज़ेहन गुलाम हो चुका है। नोटबंदी करने के बाद में करोड़ों भ्रष्टाचारियों की आत्मा बुरी तरह से काँप गयी है, बेचारोंसेन निगलते बन रहा है न उगलते बन रहा है, यूपी के चुनाव के बाद तो जनता नेजनादेश दे दिया है कि भ्रष्टाचारियोंकोबिल्कुल भी बख़्शान जाये। इन्हें हंटरों से मारा जाये। सच में, आज़ादी के बाद से ही ये जो गंदगी थी, अनावश्यक ढंग से पैसे कमाने की, वह हर दूसरे घर तो क्या हर घर के एक यादो सदस्योंके दिलों में घर कर गयी थी, हर घर इससे इतना बुरी तरह अंदर ही अंदर प्रताडित हो रहा था, जिसकी कोई हद ही नहीं थी। हर मासूम से मासूमियत इतनी बुरी तरह से छीनी गयी कि बचपन के दोस्त, जवानी के दोस्त जब प्रौढ़ा अवस्था यानी ४० की उम्र के बाद मिल रहे थे उन्हें आश्चर्य हो रहा था कि हमारा बचपन का दोस्त सोनू, मोनू, लडु, पप्पू, सारे के सारे दुनिया की भीड़ में इतने दरिंदे हो गये थे कि हैवानियत की हद को भी पार कर गये थे, क्योंकि पैसा भगवान से भी बढ़कर हो गया था। बचपन और जवानी के भोले भाले दोस्त लोग जो साझेदारी सेव्यापार कर रहे थेवे एक दूसरेको जेल मेंडाल रहे थे, हत्याकरवा रहे थे, उन्हें गुलाम बनाकर तड़पा रहे थे, दिल से अपने जिगर से प्यारे दोस्त की मौत चाह रहे थे, इस नोटबंदी ने यह सारी गंदगी तो कम से कम ख़त्म कर दी है। कोई दोस्त बंगले बनाकर तमाशा दिखा रहा था, चिढ़ा रहा था, कोई पैसा दिखाकर, कोई कारेंदिखाकर, यह क्या वहशीपन चल रहा था लोग उसे समझ भी रहे थे, लेकिन उसी में बहते भी चले जा रहे थे। यह दौर कम से कम थोड़ा सा थमा है, एक चैन की साँस तो हमले सकरहे हैं। एक ठहराव तो आया है कि सोचें कि हमसे क्या क्या ग़लतियाँ हुई हैं। कैसे हम सुधारें, क्योंकि ज़्यादा कमाकर लुटाने जाएँगे तो मोदीजी की आँखें वह देख लेंगी और आपकी ऐसी की तैसी कर देगी। मैंने देखा है कि नोटबंदी के बाद लोगों में बदलाव आया है, लोगों का व्यवहार सुधरा है, अरे भाई मुझ जैसे नाचीज़, मेरे जैसे पत्रकार पोपटलालकी इज्जत भी बहुत बढ़ गयी है। लोगों में दान करने की इच्छा बढ़ गयी है। अपने ही भाईयों,बहनों, को लूटकर माता पिता को पीट पीटकर जो संपत्ति बना चुके हैं उनमें इंसानियत जाग रही है।जो माता पिता की पेंशनों का हिस्सा करके मटरगश्ती कर रहे थे, वे अब माता पिता के हाथ पैर दबा रहे हैं, सबको नानी तो क्या परनानी याद आ गयी है, दुख भरे दिन बीते रे भइया अब सुख आयोरे, रंग जीवन में नया लायो रे...। जैसे ही मोदीजी सत्ता में आये हैं, उन्होंने नेहरूजी से लेकर इंदिराजी से लेकर, राजीवजी से लेकर राहुलजी सभी के काम पर इतनी बुरी तरह से हमला किया है कि लोग तो एक तरह से परेशान हो गये थे कि मोदीजी ऐसा क्या करना चाह रहे हैं कि वे सभी पर निशाना साधरहे हैं, क्या वेनेहरूजी, इंदिराजी से भी बेहतर बन जाएँगे, ऐसा तो कभी भी नहीं हो सकता है, ऐसा लोग सोच रहे थे, तभी मोदीजी का सब्र का पैमाना टूट गया, उन्होंने ब्रह्मास्त्र छोड़ा, उसी का पहला क़दम रहा नोटबंदी। नोटबंदी ने सच में लोगों में १९४७ के आज़ादी के तुरंत बाद जो सुकून की हवा को महसूस किया था, उसी तरह की आज़ादी को ८ नवंबर २०१६ के बाद महसूस किया है। इस समय जो अमेरिका में भारतीयों का अपमान हो रहा है, उसके बाद से हर मोहल्ले में दो लोग अमेरिका से भागकर भारत आ चुके हैं। यह सिलसिला अब और भी बढ़ता चला जायेगा। और लोगों में जो पैसे की भूख, ऐशो आराम का नशा था, घमंड जो बढ़ गया था, वह सब उतरता चला जा रहा है। अमेरिका ने जो सभी को लताड़ने का पेंचकसा है, उससे भारत में रोज़गार बढ़ेगा, लोग अब नये नये क्षेत्र को तलाशेंगे और उस पर मेहनत करना शुरू करेंगे। ट्रप ने ठीक ही किया है कि दूसरे देश के लोग अमेरिका की मलाई मार रहे हैं और अमेरिका के जो असली मौलिक लोग हैं वे मलाई नहीं खाकर छाछ से ही संतुष्ट हो जा रहे हैं। इसलिए वहाँ से भारतीयों, पाकिस्तानियों आदि को भगाया जा रहा है। बाल ठाकरे, राज ठाकरे ने भी यही किया कि मुंबई से बिहारी, उत्तरप्रदेशियों को भगाया था, नहीं तो आज हालत यह होती कि मुंबई में कोई मराठी बंधु ही नहीं रह पाता। अब अमेरिकाया जहाँ से भी लोग भारत आएँगे वे लोग उनकीसारी बचत लेकर आएँगे और यहाँ पर किसी न किसी तरह की नौकरी या कारोबार शुरू करेंगे, जिससे हमारी अर्थ व्यवस्था सुधरेगी। वो जो कमाएँगे उसके टैक्स से गरीबों का भला होगा। और ये जो बार-बार एटीएम को बंद कर रहे हैं, या एटीएम में पैसा नहीं डाल रहे हैं उससे परेशानी तो हो रही है, लेकिन लोगों में पैसे की भूख तो कम हो गयी है, और लोग अब बहुत बड़ा निवेश नहीं कर रहे हैं। बड़ा निवेश जो भी करता है, वह अपने घर की लाशों पर चलकर, मतलब उन्हें पैसा नहीं देकर, उन्हें मजबूरी में अकेला छोड़कर पैसे का निवेश करता है, मोदीजी ने वो सारे रास्ते बंद कर दिये हैं। पैसा कमाने के रास्ते तो मोदीजी खोल रहे हैं लेकिन पैसा खर्च करने के सारे रास्ते बंद कर रहे हैं। लोग सोच रहे हैं कि पैसा कमाकर करेंगे क्या, सारा हिसाब तो मोदीजी ले जाएँगे, इसलिए ऐसा करो कि जो कमाओवो देश के लिए लगाओ, एटीएम को किसी किसी दिन पैसा देने से रोकने से लोग पैसा ख़र्च करने से वंचित हो रहे हैं। पैसा जितना कम दिखाई देगा उतना ही बेकार का भ्रष्टाचार भी ख़त्म होगा जैसे मेडिसीन की पढ़ाई में एक करोड़ रुपया लग रहा है, उस पढ़ाई की रसीद अब बनानी पड़ेगी, सरकार को दिखाना होगा कि इतना पैसा इस पढ़ाई में क्यों ले रहे हैं, उसके एक-एक पैसे का इनकमटैक्स को हिसाब देना होगा। लेकिन जो भी पैसा दे रहा है या ले रहा है, मोदीजी ने कुछ ऐसा होशियारी से भरा इंतेज़ाम कर दिया है कि उस एक करोड़ रुपये का हिसाब आज नहीं तो तीन चार महीने में दिखाई देने लग जाता है। अब समाजवाद लौट रहा है, पूरी जनता को मिलकर अब इस आंदोलन में भाग लेना चाहिए। हम आगे नहीं बढ़ेगे तो हमारी आने वाली पीढियाँ भी गुलामी का जीवन जिएँगी। अब उन व्यापारियों को टैक्स का रोना नहीं रोना चाहिए जिनके पास पहले से दो मकान, दो ज़मीनें, एक फैक्टरी हो, उन्हें तो जी भरकर दान देना चाहिए। देश उन्हीं को चलाना चाहिए। व्यापारियों को कम से कम ४० की आयु के बाद दो घर रखकर, एक फैक्टरी रखकर, दो ज़मीनें रखकर पैसे की भूख कम करनी चाहिए। क्योंकि पैसा तो अंतहीन होता है, हम जितना कमाते चले जाते हैं उतना ही कम लगता है, आज आप टाटा, बिरला, अंबानी किसी से भी जाकर पूछिये कि क्या आपकी पैसे की भूख समाप्त हो गयी है क्योंकि दो दो पीढ़ियों से आप पैसा ही कमा रहे हैं तो वे सारे कहेंगे कि मरते दम तक हम कमातेरहेंगे, क्योंकि हमारे पास पैसे की बहुत कमी है, सो, वेतो९९ के फेर में हैं, लेकिन हमें तो इस गंदगी से बचना चाहिए। आज नोट पर किसकी तस्वीर है गांधीजी जो एकदम फक्क्ड था, फ़कीर की तबीयत का था, तो हरनोट गिनते समय यही सोचों कि हे भगवान यही नोट असली झगड़े की जड़ होती है, इसलिए इससे जितना दूर रहो ठीक रहेगा, पैसा सबकुछ नहीं, पैसा जीने का साधन मात्र है। जीने जितनामिल जाये तो भजन कीर्तन में लग जाओ और ये भजनगाओ, हे रामचंद्र कह गये सिया से, ऐसा कलजुग आयेगा, हंस चुगेगा दाना दुनका कव्वा मोती खायेगा।

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