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माता पिता की लाशों पर घर बनाया

कई लोगों ने माता-पिता, भाई-बहन की छाती को रौंदकर, उनकी लाशों पर चलकर अपने मकान बनाये है  एक घर में पिता गुज़र गये। माता रह गयी। माता ने 8 हज़ार की नौकरी कर ली। वह बच्चों को पाल रही थी। बच्चे बडे हुए। बच्चों ने कमाना शुरू किया तो वे माता को एक भी पैसा नहीं देते थे। बडा बेटा एक भी पैसा नहीं देता था तो छोटे ने कहा कि बडा नहीं देता है तो मैं क्‌यों दूँ? बडा बेटा कहता था कि माता मुझे तन™वाह नहीं मिलती मैं अभी ट्रेिनग पर हूँ न, तीन साल तो ट्रेqनग में ही बिना तन™वाह के निकल जाएँगे। छोटे ने कहा मेरे व्यापार में नुकसान हो रहा है। मैं उस नुकसान को बहुत ही मुशि्कल से कवर कर पा रहा हूँ, तुमसे ही तो उल्‌टे एक-एक हज़ार लेकर लोगों को नुकसान भर रहा हूँ।

भारतीय टीम ने नंबर एक टीम बनने

भारतीय टीम ने नंबर एक टीम बनने वेÀ fलए बहुत मेहनत की है, उनको लाख-लाख बधाई इस उपलfब्ध वेÀ fलए भारतीय टीम सारी दुfनया की सबसे कfरश्माई टीम है, इसने नंबर एक रैंfवंÀग प्राप्त तो की, लेfकन बहुत ही चमत्काfरक तरी॰वेÀ से की। वह चमत्कार यह है fक fपछले आठ महीने में भारतीय टीम ने छह से लेकर आठ fखला॰fडयों को लगातार टीम में बदला। fजसमंे रहे गंभीर, पाfथ&व पटेल, मुरली fवजय, जयंत, रहाणे, सामी, करूण नायर, अfमत fमश्रा, इतने fखलाड़ी बदलकर कर भी आप नंबर एक बने रहते हैं यह बात बहुत ही हैरत में डालने वाली और fनराली हो जाती है। जबfक हर नंबर एक की टीम लगातार एक साल तक अपने fवजयी टीम को ही हरेक मैच में साथ लेकर चलती है। जब तक fक उसका कोई fखलाड़ी घायल नहीं हो जाता है। लेfकन कोहली का अध्ययन बहुत ही गहरा है और बहुत ही fक्रÀकेट वेÀ आला दजे& वेÀ fवद्वान की तरह है, या यह कह सकते हैं fक उनकी ॰fकस्मत ऐसी चल रही है fक वे fजस fखलाड़ी पर हाथ रख दे रहे हैं वह इंसान पारस या सोना बन जा रहा है। करूण नायर का fतहरा शतक इसी बात का उदाहरण है। अब ऑस्टे्रfलया दूसरा टेस्ट हारने वेÀ बाद यही सोच रही है fक भारत में आकर ख...

पहले टेस्ट में कयामत जैसी हार विराट कोहलीजी

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पहले टेस्ट में कयामत जैसी हार, दूसरे टेस्ट में चमत्कार जैसी जीत, क्या बात है विराट कोहलीजी  नीरज कुमार  जब भारत पहला टेस्ट बहुत ही बुरी तरह से हार गया था, लगभग भारत को धूल चटा दी गयी थी, उनकी ही धरती पर विश्वचैंपियन टीम वे केवल दो पारियों में वे केवल सौ पार रन ही बना पायी थी, तब किसी ने नहीं सोचा कि भारत क्या इस श्रृंखला में क्या एक भी टेस्ट जीत पायेगा, सभी लोग तय मान रहे थे कि इतनी धूल चटा दी जाने वाली हार के बाद भारत इस बार 0-4 से हार सकता है।  और यह बहुत दद&नाक हार होने जा रही थी, सभी को यह हार सदियों तक याद रहने वाली थी। क्योंकि ऑसी की टीम fस्पन की तैयारी बहुत ही अच्छे तरीवे के से करवे के आयी थी, वे पुणे टेस्ट और बैंगलुरू की पहली पारी में बल्लेबाजी भी जमकर कर रहे थे, और भारत को भी धूल चटाने जैसा ही आउट करते ही चले जा रहे थे। दूसरे टेस्ट में तो जब भारत 189 पर आउट हो गया था, उसमें सबसे बुरी बात तो यह थी कि अंत वे के पाँच विवे केट वे केवल बीस रन वे के भीतर ही धराशायी होते ही चले गये, जैसे बल्लेबाजों की बारात fनकल रही थी, जैसे लोग मंदिर मंे टीका लगाने वे के लि...

मोदीजी ने नोटबंदी करके सभी भारतवासियों के सिर से बहुत भारी बोझ उतार दिया है।

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मोदीजी ने नोटबंदी करके सभी भारतवासियों के सिर से बहुत भारी बोझ उतार दिया  है।  गंदे पैसे का बोझ, भ्रष्ट पैसे का बोझ, नोंच नोंचकर खाने के पैसे का बोझ, एक ही चोंट मारी तो सारी धरती fहल गयी। भूचाल आ गया, आत्मा भी रो पडी भ्रष्टाचाfरयों की।  जय हो मोदीजी, एक बाबा झोली लेकर आया और काम तमाम करके बैठा है शान से गद्दी पर। मोदीजी ने गरीबों के fलए सात सौ दवाओं के दाम भी कम कर fदये हैं, ये है मोदीजी का मानवता का उत्वृष्ट रूप वरना ये राक्षस दवाओं के दाम बढाकर जनता को रौंद रहे थे। इलाज पर तो चोंट धमाकेदार रही अब शिक्षा  के वहशीपन पर भी वृपा करके जल्दी से जल्दी मोदीजी वुछ कीfजए, हम आपको एक ईश्वर के भेजे दूत की तरह देख रहे थे, आप हमारे fपतातुल्य हैं, बा॰जारवाद को आप बुरी तरह पाताल में गाडने की तैयारी कर रहे हैं। यह भी हमें पता है, महँगाई को दफन कर रहे हैं, देश के सबसे गरीब आदमी के चेहरे पर fदन ब fदन मुस्कान आ रही, यह मुस्कान चौडी होती जाये हम ईश्वर से इसी तरह की सद्बुfद्ध की कामना आपके fलए कर रहे हैं। दाढी वाले बाबा को लाख लाख प्रणाम।   भ्रष्टाचार का गंदा बोझ सभ...

मोदीजी कालाधन की परिभाषा कैसे करेंगे

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मोदीजी कालाधन की परिभाषा कैसे करेंगे, अपने आपको आप देश के ग़रीब नागरिकों के साथ जोड़कर देखिये, जो आपके पास धन है उससे हिसाब लगाकर देखिये कि कालाधन क्या है, तब पता चल जायेगा कि आपके पास कितना काला धन है  जैसे-जैसे नोटबंदी के दिन बढ़ते जा रहे हैं लोग दूसरे लोगों से सवाल कर रहे हैं और अपने दिल और मन से भी पूछ रहे हैं कि मेरे पास जो धन है वह कालाधन है या सफ़ेद धन हैं? एक पत्रकार के नाते मैं आपसे नैतिक सवाल करता हूँ कि आपके पास जितना धन है क्या उतना ही भारत के आम नागरिक के पास है| एक आम आदमी की महीने की तनख़्वाह छह हज़ार से एक लाख रुपये तक हो सकती है, लेकिन क्या छह हज़ार रुपये जिसकी तनख़्वाह है क्या वो चैन से जी पा रहा है| अगर नहीं जी पा रहा है, तो आपके पास अगर तीस लाख से अधिक का धन है वह काला धन है| सरासर कालाधन है, आपके पास के तीस लाख यानी दस लाख के ब्याज से भोजन, दस लाख के ब्याज से रखरखाव और बचे दस लाख के भोजन से कपड़े लत्ते, यानी एक व्यक्ति के लिए तीस लाख पर्याप्त होते हैं, क्योंकि आजकल हरकोई दस साख शेयर-म्युचुअलफ़ंड में डालता है, या उसके मेच्योर होकर दस लाख हो चुके हैं, दस...

मोदीजी, नोटबंदी आने से समुभय इंसानियत से भरा भारत लौट रहा है

मोदीजी, नोटबंदी आने से समुभय, इंसानियत से भरा भारत लौट रहा है, लोग होटलबाज़ी से ऊबकर घर की ओर लौट रहे हैं  नोटबंदी करने से नयी पीढ़ी में फ़ैशनबाज़ी, होटलबाज़ी, गुलछर्रेबाज़ी में बहुत कमी हो गयी है, नयी पीढ़ी नोटों की सप्लाई नहीं होने की वजह से सालों के बाद घरों के भीतर दिखाई दे रहे हैं| यह परिवारो के लिए बहुत ही अच्छा संदेश दिखाई दिया| लोगों के पास सिनेमा देखने के लिए चार-चार हज़ार रुपये नहीं दिखाई दिये|  लोगों को तनख़्वाह भी बहुत ही धीरे-धीरे करके मिलने लगी थी| कुल मिलाकर कुछ समय तक रुक कर जीवन के बारे में सोचने का समय भी लोगों को मिला और नोटों की अहमियत लोगों को पता चली| लेकिन एक बात तो तय है कि लोग जब शॉपिंगबाज़ी के बारे में नहीं सोचते हैं तो देश के लिए सोचने लग जाते हैं, और इस समय मोदीजी ने देश को सबसे अच्छा माहौल दिया है| कहीं पर भी सांप्रदायिकता नहीं है, कोई भी हिंदू-मुस्लिम के अलग-अलग होने की बात तक ज़ुबान पर नहीं ला रहे हैं| लोग जातिवाद की बात पर भी ज़ुबान पर नहीं ला रहे हैं| इस समय शेयर बाज़ार बहुत ही अच्छे तरीक़े से चल रहा है| लगभग २७ हज़ार के पार चल रहा है| यानी आपके पास पै...

नवाज़द्दीन ने रईस फ़िल्म में बहुत यादगार रोल निभाया

शाहरुख़ ख़ान से बेहतर और बहुत यादगार रोल निभाया है नवाज़द्दीन ने रईस फ़िल्म में  रईस फ़िल्म वैसे तो एक मसाला फिल्म की तरह ही है, इसमें शाहरुख़ ने जैसा अभिनय किया है, उससे कहीं बेहतर अभिनय अमिताभ बच्चन ने दीवार फ़िल्म में किया था, अब जाकर दीवार की अहमियत सामने आ रही है| लेकिन यहॉं रईस में शाहरुख़ ख़ान ने अतुल कुलकर्णी को मारते समय जो रो-रोकर उसकी हत्या करने का शांत अभिनय किया है वह लाजवाब है और दूसरे एक दृश्य में ग़ुस्से में फ़ोन पटकने का दृश्य है वह भी अति उत्तम है| अब आते हैं लिटिल मास्टर नवाज़ुद्दीन भाई पर|  नवाज़ का न चेहरा है, नक़द है, न काठी, न शरीर से बलवान, लेकिन एक्टिंग की मशीन| रईस फ़िल्म में निर्देशक राहुल ढोलकिया ने हालॉंकि नवाज़ को लंबे स्क्रीनप्ले नहीं दिये,ज़्यादा बाज़ी मार सकते थे| सीधे कट टू कट लगभग क्लोज़ अप दृश्य दिये हैं, जबकि शाहरुख़ को लंबे-लंबे स्क्रीनप्ले दिये हैं| लेकिन उनमें भी कम स्कोप रहने पर भी नवाज़ भाई ने अभिनय में जो जादू जगाया है, वह कम से कम कहें तो बहुत जादुई है| हर दृश्य को असीम गहराई से किया है, राहुल ने उन्हें कैमरा प्लेसमेंट बहुत ही अच्छी जगह दिये हैं हर...

नोटबंदी का बहुत फ़ायदा हुआ है

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नोटबंदी का बहुत फ़ायदा हुआ है लोगों का ख़ून चूस कर धन संचय करने की आदत कम हुई है, अब सरकार को वंचित लोगों का भला करना चाहिए   नोटबंदी के बाद महँगाई आश्‍चर्यजनक तरीक़े से कम हो गयी है, टमाटर पॉंच रुपये किलो हो गये थे, सड़कों पर फेंके जा रहे हैं, टमाटर सस्ते इसलिए हो गये कि दरअसल इसका सही दाम यही हुआ करता था, ये तो बिचौलिये थे जो इसका काम दाम बहुत ज़्यादा करने जनता को लूटा करते थे, अरहर-तुअर की दाल के दाम आश्‍चर्यजनक तरीक़े से कैसे नीचे आ गये, क्योंकि नोटबंदी के कारण लोगों ने महँगी दाल ख़रीदना बंद कर दिया था, तो व्यापारियों ने सोचा कि इतनी महँगी दाल बेचेंगे तो कोई लेगा नहीं, लोग दूसरी दालें खा लेंगे, और हमारी अरहर की दुकानें बंद हो जाएँगी, फिर लोगों ने या कहिए कालाबाज़ारियों ने झक मारकर नोटबंदी के कारण दाल को सस्ती कर दी और आज दाल सत्तर रुपये से लेकर केवल नब्बे रुपये में बेच रहे हैं, जबकि नोटबंदी के पहले यही दाल १६० रुपये से लेकर २५० रुपये किलो तक बिक रही थी| कालाबाज़ारी लोग अब लहसुन के दाम बढ़ा रहे हैं, ये वे ही कालाबाज़ारी करने वाले लोग है जो बाज़ार में किसी न किसी तरह का षड़यंत्र किया...

मोदीजी क्या व्यापारियों को पेंशन दी जायेगी? - EDITOR NEERAJ KUMAR

नोटबंदी की वजह से दो महीने के भीतर कई व्यापारियों की दुकानें व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हो चुके हैं, क्या व्यापारियों को पेंशन दी जायेगी?  नोटबंदी में सारे देश की जनता ने मोदीजी का भरपूर सहयोग दिया है| मोदीजी अब इस समय उन लोगों की ओर ध्यान न दें जो कालाधन को सफ़ेद करने में सफ़ल रहे| क्योंकि करोड़ों लोगों के दिल में भ्रष्टाचार रग-रग में बस चुका था| लोगों में धारणा घर कर गयी थी कि पैसा होगा तभी इज़्ज़त होगी| रिक्शावाला से लेकर अरबपति सभी के लिए पैसा ही भगवान हो गया था| और इन बीस साल में सच में पैसा ही भगवान हो चुका था, पैसा है तो आप भगवान नहीं तो हैवान  कहला रहा था, इंसान| इस ज़माने में जो भ्रष्ट लोग हो गये थे, उनके आगे-पीछे सारी दुनिया चल रही थी, अगर आपने कहा कि मैं ईमानदार हूँ, तो लोग आपको गालियॉं दे रहे थे| पूरी तरह से उल्टी गंगा बह रही थी|  लोगों ने ईमानदारी में जीकर देखा तो उसमें नसीहतें, गालियॉं, ज़लालत, हिकारत, मुफ़लिसी, यही मिल रहा था| बहुत अच्छा हुआ कि मोदीजी ने नोटबंदी कर दी, इससे लोगों को एहसास तो हो गया कि जो पैसा भगवान माना जाता था, उसी पैसों पर चोंट की जा सकत...

क्या आज के समय में ससुराल से पैसा लेना ठीक है - EDITOR NEERAJ KUMAR

क्या आज के समय में ससुराल से पैसा लेना ठीक है या नहीं, हम नहीं लेते तो बच्चे हमें ताने मारते हैं कि आपने ईमानदारी की ज़िंदगी जीकर क्या हासिल किया? आजकल सबसे बड़ा पाप है तो वह यह है कि हम ईमानदारी से जी रहे हैं| आज ईमानदार आदमी के पास क्या है, दस साल पुराना ़िफ्रज, छह साल पुराना बत्तीस इंच का टीवी, एक कार पुरानी या नयी, दो स्कूटर, एक छोटा सा मकान, या नहीं तो एक किराये का मकान| जबकि दुनिया बहुत ही आगे निकल चुकी है| लोगों के पास बहुत सारे पैसे हो गये हैं| पचास इंच का टीवी, एक घर में तीन तीन कारें, हर कमरे में पचास इंच का टीवी, पचास हज़ार के तीन मोबाइल, कम से कम दो करोड़ का मकान, उसके अलावा तीन और मकान| लोग अपने रिश्तेदारों की तरफ़ देखते हैं तो कहते हैं वो लोग कितना आगे निकल गये, हम पीछे ही रह गये|  बहुत सारे लोगों ने अपनी ससुराल से एक भी पैसा नहीं लिया| और ससुराल वाले इस बात की तारीफ़ भी नहीं करते हैं वे कहते हैं कि आप गधे थे जो ससुराल से पैसा नहीं लिया| सभी लोग लेते हैं, आप ईमानदारी में ही मरते रह गये, लोगों ने तो अपने लिए नहीं अपने बच्चों के लिए ससुराल से पैसे लिए और आज वे अपने बच्चो...

महिलाएँ पैसा कमाने का बहुत सारा टेंशन ले रही हैं - EDITOR NEERAJ KUMAR

महिलाएँ पैसा कमाने का बहुत सारा टेंशन अपने पर ले रही हैं जिससे उनकी मौत जवानी में ही हो जा रही है, जबकि पहले मर्द पहले मरते थे और महिलाएँ बहुत जिया करती थीं पैसे के लोभ-हिरस के कारण महिलाओं का जीवन बहुत ही टेंशन से भरपूर हो चुका है, एक केवल पैंतीस साल की महिला ब्यूटीपार्लर का काम सिखाने का काम तीस लड़कियों को सिखाया करती थी| तीस लड़कियों के साथ उसने क्रिसमस की पार्टी मनायी| क्रिसमस के दिन उसने बहुत सारा केक खा लिया| उसे पता था कि उसे शुगर की बीमारी है, और वह शुगर की गोलियों में एक हज़ार रुपया लग रहा है, इसलिए वह गोलियॉं भी नहीं खा रही थी, वह सोच रही थी कि मीठा कम खाऊँगी तो शुगर कंट्रोल में रहेगी| लेकिन केक खाते समय शुगर के बारे में सोचना बंद कर दिया, उसके यह बात ध्यान से ही निकल गयी थी| उस दिन रात में केक खाने से शुगर शूटअप हो गयी और बेहोश होकर गिर गयी| और पॉंच मिनट के भीतर ही उसकी अस्पताल ले जाते समय मौत हो गयी| सो, उस केवल पैंतीस साल की महिला की मौत केवल एक दिन के पार्टी के मनाने और बहुत मीठा खाने से मौत हो गयी|  उसकी चार साल और आठ साल की दो बेटियॉं हैं| अब उनकी ज़िंदगियों का ...

आज के बाद लोगों को विश्‍वास नहीं होगा कि धौनी जैसा चमत्कारिक कप्तान भारत के लिए क्रिकेट खेला था! - EDITOR NEERAJ KUMAR

आज के बाद लोगों को विश्‍वास नहीं होगा कि धौनी जैसा चमत्कारिक कप्तान भारत के लिए क्रिकेट खेला था! औने पौने दे घुमा के, खर्चन खुरचन दे घुमा, जुटा हौसला, बदल फ़ैसला....दे घुमा के घुमा के दे घुमा के... यह गीत २०११ के विश्‍वकप का भक्ति गीत था, और इस गीत को पूरी तरह से दे घुमा देने वाला जुमला, हक़ीक़त में बदलने का जज़्बा धौनी की कप्तानी में ही देखा गया| यह बहुत ही बड़ी जीत एक जीती जागती सच्चाई के रूप में दिखाई दिया| और हम विश्‍वकप जीतकर २०११ के विश्‍वविजेता बने थे| अपने समय के दि ग्रेट फ़िनिशर (मैच बल्लेबाज़ी से  आसानी से ख़त्म कर लेना) और अपने समय के बेहतरीन कप्तान के रूप में उन्हें आँका जाना बेशक हमारे लिए शान रही और दुनिया के लिए मजबूरी भी रही| विश्‍वकप जीतना, २०-२० कप जीतना और चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीतने का आला दर्जे का कप्तानी कीर्तिमान केवल और केवल इन्हीं महाशय को जाता है| एक जादूगर कप्तान और एक अभेद्य बल्लेबाज़ के रूप में एकदिनी मैच में धौनी के भारतीय टीम में आने के पहले और बाद में दो बातें बदल गयीं, उनके टीम में आने के पहले हम सभी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों का ब्लडप्रेशर क्रिकेट मैच देखत...

आज हर इंसानकिसी न किसी बड़े क़र्ज़े या बड़े ख़र्चे में पड़ गया है - EDITOR NEERAJ KUMAR

आज हर दूसरा इंसान या कहिए हरेक इंसान किसी न किसी बड़े क़र्ज़े या बड़े ख़र्चे में पड़ गया है, वहॉं से वह निकल ही नहीं पा रहा है, क़रीब दस से पंद्रह साल उसके उसी में फँस जा रहे हैं जिससे उसका जीना हराम हो गया है टीवी, अख़बार,मोबाइल, दोस्ती, रिश्तेदार इन सब लोगों से आजकल दूर रहकर ही अपनी जान बचायी जा सकती है| टीवी देखते हैं तो बड़े-बड़े बंगले या फ़्लैट ख़रीदने के विज्ञापन दिखाये जाते हैं| हम किसी बिल्डर के पास जाते हैं तो वह कहता है कि हम आपको तीन साल के भीतर एक आलीशान फ़्लैट बनाकर देते हैं फ़्लैट की क़ीमत चालीस लाख रुपया है, आप अभी हमें बीस लाख रुपया दे दीजिए, बाक़ी के बीस लाख फ़्लैट में गृहप्रवेश की पूजा के दिन दे दीजिए| अगर हम बीस लाख रुपये दे देते हैं तो वह बिल्डर हमारा घर तीन साल से भीतर में बनाकर नहीं देता है| वह उसमें पॉंच साल से लेकर आठ साल लगा देता हैं| जबकि बीस लाख रुपया देकर हम फँस जाते हैं| और इंतज़ार में, नया फ़्लैट ख़रीदने के इंतज़ार में हमारी माता मर जाती है, पिता मर जाते हैं, भाई मर जाता है लेकिन वह फ़्लैट बनकर तैयार ही नहीं हो पाता है| और जब हो पाता है, तब तक हमारे बाल सफ़ेद हो जाते हैं, भा...

क्या अपने ही साले, जीजा और बहन की प्रगति नहीं चाहते साले ऐसा क्यों करते हैं?

मेरे से ज़्यादा पैसा मेरे किसी भी रिश्तेदार के पास नहीं होना चाहिए| ऐसी बात आजकल हरेक के मन में हो गयी है| कोई किसी से आगे बढ़ रहा है यह किसी से देखा नहीं जा रहा है| कोई किसी के पास मर जाता है तो यही सोचा जाता है कि अब वो इंसान तो मर गया अब देखते हैं उसका घर कैसे चलता है| फिर उस परिवार की मदद तक नहीं की जाती है, बैठकर सारे लोग तमाशा ही देखते रहते हैं कि वह परिवार कैसे ग़रीबी में पल रहा है, उनकी ग़रीबी देखकर उनको बहुत ही मज़ा आता रहता है|   लोग पहले तो यह चाहते हैं कि मेरे सगे भाई के पास मेरे से पैसा कम होना चाहिए| भाई के बच्चे पैसे पैसे को मोहताज होते रहना चाहिए, जबकि मेरे बच्चे राज करते रहने चाहिए| और जिसके पास पैसा कम हो वह भाई तड़पता रहना चाहिए| ऐसा लोग चाहते हैं फिर जो लोग ऐसा चाहते हैं कि वे लोग भाई की बर्बादी के बाद अपने जीजा या साले की बर्बादी का सोचते हैं| जीजा चाहता है साले के पास पैसा नहीं होना चाहिए और साला चाहता है कि मेरे जीजा के पास पैसा कम से कम होना चाहिए और जीजा साले के टुकड़ों पर पलता रहना चाहिए| यह तो बहुत अजीब बात है कि साला अपनी बहन के घर को आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना...

ऐसा लग रहा है कि मोदीजी के हाथ में देश सुरक्षित ही नहीं चरित्रवान बन रहा है

ऐसा लग रहा है कि मोदीजी के हाथ में देश सुरक्षित ही नहीं चरित्रवान बन रहा है, महँगाई कम हो रही है, पेट्रोल के दाम कम होंगे तो बेहतर होगा, ये गांधी,जेपी और लोहिया का देश बनना चाहिए, जहॉं धन नहीं चरित्र ऊँचा होना चाहिए, समाजवादी इसी तरह का देेश चाहते हैं   कुछ गुजरातियों से मैंने पूछा कि हमारे नरेंद्र दामोदर मोदी किस तरह के व्यक्ति हैं? सभी का कहना रहा कि वह वचन के पक्के हैं और उनके कार्य में एक तरह का रहस्य रहता है, वे जो ठान लेते हैं वो करके दिखाते हैं, उन्होंने पहले से हर दूसरा काम जोखिम उठाकर किया है| सो, इस तरह के प्रधानमंत्री को हम सभी ने मिलकर ढाई साल पहले चुना था |  नोटबंदी से देश को बहुत बड़ा अच्छा झटका ये लगा है कि लोगों को भारत का पॉंच हज़ार साल पुराना समय याद आ गया है| लोग कह रहे हैं कि पहले भारत के गॉंवों में ब्राह्मण लोगों की हर बात सुनी-अमल में लायी जाती थी, साथ ही शिक्षक और वैद्य की बात भी गंभीरता से ली जाती थी, और  दूसरी ओर ज़मींदारों का धन से बैभव से राज रहा करता था, पूरा दबदबा रहा करता था| ज़मींदार सभी को दबाकर रखा करते थे और ब्राह्मण लोग जो अच्छे चरित्र...

लोग कहते हैं कि दो बेटे अच्छे होते हैं जबकि दो बेटियॉं ज़्यादा अच्छी होती है

लोग कहते हैं कि दो बेटे अच्छे होते हैं जबकि दो बेटियॉं ज़्यादा अच्छी होती है, दो बेटों की दो बीवियॉं आती हैं तो देवरानी-जेठानी में जीवन भर झगड़ा चलता ही रहता है, एक लव मैरिज की बहू हो तो रोज़ की महाभारत चलती रहती है  पुराने ज़माने में हरेक शादी पंद्रह से बीस साल की उम्र के बीच में ही कर दी जाती थी, बड़े-बूढ़े लोग ही शादी कर देते थे| केवल अपने हिसाब का परिवार देखा जाता था, सुंदरता नहीं देखी जाती थी, लंबा दूल्हा ठिगनी दुल्हन ढूँढी जाती नहीं थी बल्कि, मिलते ही शादी कर दी जाती थी| लड़का-लड़की अलग-अलग छतों से देख लिये जाते थे| शादी पहले से तय कर दी जाती थी| कुछ पसंद-नापसंद की बात होती ही नहीं थी| शादी मिल बॉंटकर कर दी जाती थी, तो दहेज़ देना पड़ता था, सारा जीवन कुछ न कुछ देना ही पड़ता था, लेकिन दोनों परिवार मिलजुल कर रहा करते थे| यह सिलसिला सारी ज़िंदगी चला करता था, लेकिन स्कूल-कॉलेज से लोग लड़के, लड़की को भगा ले जाते थे, दोनों परिवार की बहुत ही बेइज़्ज़ती होती थी, और सारी ज़िंदगी लव मैरिज की मियॉं-बीवी के घर वाले एक दूसरे को बुरी निगाह से देखा करते थे| जब लव मैरिज की मियॉं-बीवी को बच्चा हो जाता ...

हम तो फ़कीर हैं झोला उठाएँगे और चल पड़ेंगे

हम तो फ़कीर हैं झोला उठाएँगे और चल पड़ेंगे  हम तो फ़कीर हैं झोला उठाएँगे और चल पड़ेंगे, मोदीजी की यह बात आज़ादी के परवानों की याद दिल गयी जो अपनी जान की आहुति देकर देश के लिए जान दे दिया करते थे होनी को कौन टाल सकता है| और होनी भी नोटबंदी की ऐसे व्यक्ति से हुई जो हमारे सबसे प्रिय व्यक्ति रहे-नरेंद्र दामोदर मोदीजी से हुई| इससे सबक़ यह सीखना चाहिए कि हमें पैसे का भूखा नहीं होना चाहिए| हर सरकार की ब्यूरोक्रैसी  से बहुत अनबन रही थी, इस नोटबंदी ने ब्यूरोक्रेसी की ताक़त को बहुत हद तक कम कर दिया है| संंासद से लेकर हर छुटभैय्या नेता ने धन बहुत जमा कर लिया था, सारा कुछ चला गया| लोगों ने बहुत ही मेहनत करके पैसा कमाया था, होते-होते वह सफ़ेद धन काला धन हो गया था| अब सारा धन हाथ का मैल होकर रह गया है| ऐसा होगा किसी से नहीं सोचा था, लेकिन अब सोचना यह है कि हमंें तौबा करके भी पैसे से ख़ासकरके नोटों से प्रेम नहीं करना चाहिए| नयी पीढ़ी तो धन की पागल हो गयी थी| उसके लिए धन का लालच नहीं करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सबक़ होना चाहिए| ये धन-दौलत कभी भी भारतीय जीवनशैली की नस-नस में बसी हुई नहीं...

विराट कोहली ने चेन्नई टेस्ट की जीत बोनस के रूप में दी है

विराट कोहली ने चेन्नई टेस्ट की जीत बोनस के रूप में दी है विराट कोहली ने चेन्नई टेस्ट की जीत बोनस के रूप में दी है, यानी में तीन जीत पर एक जीत फ्री के रूप में दी है, और इंग्लैंड का दिल बुरी तरह से तोड़ दिया है, यह जीत करुण नायर की तिहरे शतक का तोहफ़ा है जीत का रोमांच अपने चरम पर आ गया जब भारत ने इंग्लैंड की टीम को हवाई जहाज़ में बैठते-बैठते सम भी बहुत गहरा सदमा दिया| उन्हें जाते-जाते पटख़नी दे दी, चेन्नई टेस्ट में हरा दिया| कल से यही ख़यालात आ रहे थे कि बेचारी इंग्लैंड को सुकून से जाने दिया जाये| लेकिन कोहली के इरादे कुछ और थे, और जो हक्ष होना था वह होकर रह गया|  बड़े आराम से ड्रा होने वाला मैच अचानक ऐसा पल्टी खाया कि इंग्लैंड टीम की नानी याद आ गयी और पॉंच दिन का बेफ़िक्र सा लगने वाला सुस्त मैच आधे से एक घंटे के भीतर इंग्लैंड के लिए काल बनकर आया और भारत के लिए स्वर्ग की फुहार बनकर सामने प्रकट हो गया| हर विदेशी टीम भारत की हरेक, चौथे और पॉंचवें दिन की पिचों से घबराते हैं, लेकिन इंग्लैंड को चार बार चौथा और अंतिम दिन सौग़ात के लिए टॉस जीतकर मिल चुका था| लेकिन कोहली की पारियों ने...

अब समय आ गया है कि दूल्हा छोटी उम्र का हो और दुल्हन बड़ी उम्र की हो

महानगरों में जीवन से लड़ता आदमी - 8 अब समय आ गया है कि दूल्हा छोटी उम्र का हो और दुल्हन बड़ी उम्र की हो, तो इससे दो परिवारों का फ़ायदा हो सकता है, बेटी अपने माता-पिता के लिए पैसा जमा करके दे सकती है, या नहीं तो दुल्हन को अपने मायके को, शादी के बाद में लगातार पैसे देने चाहिए, ऐसा क़रार ससुराल के साथ करना चाहिए अब हमारे देश में करोड़ों माता-पिता ऐसे हो गये हैं जिन्हें दोनों ही लड़कियॉं पैदा होती हैं, महँगाई इतनी बढ़ गई है कि तीसरी बार बच्चा पैदा करने की कोशिश ही कोई माता-पिता नहीं कर रहे हैं| दो पर ही पूर्णविराम या फ़ुलस्टॉप लगा दे रहे हैं| पहले क्या था कि बेटी पेट में होती थी तो उसे पेट में ही मार दिया जाता था, क्योंकि बेटी होती थी तो पचास लाख या बीस लाख तो शादी में लगाने ही होते थे| लेकिन अब हरेक बेटी कमाने भी लगी है तो लोग बेटी को पैदा कर भी रहे हैं|

हर शहर में एक तरह का जंगलराज चलता है

महानगरों में जीवन से लड़ता आदमी - 7 हर शहर में एक तरह का जंगलराज भी चलता है,जहॉं पर एक इंसान दूसरे इंसान की जान भी ले लेता है,पैसों के लिए, यहॉं पर दस हज़ार बीस हज़ार से लेकर एक लाख के लिए भी एक-दूसरे की हत्या तक कर दी जाती है यह खेल होता है ब्याज पर पैसे देने का,और यह पैसा बहुत ही ऊँचे ब्याज पर दिया जाता है एक आदमी को शादी के बाद पंद्रह साल तक बच्चा नहीं हुआ| इस पर उसने अपनी सारी कमाई डॉक्टरों पर लगा दी, उसके बाद उसको शादी के सोलह साल के बाद एक बच्ची पैदा हुई| पैदा होने में बहुत तकलीफ़ हो रही थी, तो इलाज में क़रीब चार लाख रुपये लगाने थे, अब उसके पास चार लाख रुपये नहीं थे, एक आदमी ने उसे तीन प्रतिशत ब्याज पर उसे चार लाख रुपये दिये| गिरवी उसने कुछ नहीं रखा| केवल भरोसे पर दिया| भरोसे पर दिया गया पैसा बहुत सारे ब्याज का होता ही है| यानी बारह हज़ार रुपया तो उसका ब्याज ही आ रहा था| अब उस बच्ची के बाप के पास दो ही बातें थीं या तो बच्ची को मरने दूँ या फिर चार लाख रुपये देकर बच्ची को पैदा करूँ| बाप ने सोचा कि बेटी पैदा हो रही है, पैदा होने के बाद भी मेरा सारा जीवन उसको पालने-पोसने और उसकी शाद...

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