अमीर भाई अपनी ग़रीब बहनों की तरफ नफ़रत की नज़र से देख रहे हैं
अमीर भाई अपनी ग़रीब बहनों की तरफ दया-करुणा की नहीं नफ़रत की नज़र से देख रहे हैं अमीर भाई अपनी ग़रीब बहनों की तरफ दया-करुणा की नहीं नफ़रत की नज़र से देख रहे हैं, जबकि अमीर भाई का फ़र्ज बनता है कि गरीब बहन की मदद करें, मदद नहीं करें तो कमों का फल यहीं मिल जाता है शादी के बाद बहन की ज़िंदगी पूरी तरह से बदल जाती है, या तो वह महलों में राज करती है या नहीं तो छोटे से घर में तड़प-तड़पकर जी लेती है। इसलिए बहनों की रक्षा करना उनके माता-पिता का ही फ़र्ज नहीं है बल्कि भाईयों का भी फ़र्ज बनता है। आजकल तो भाईयों को अपनी बहन की ग़रीबी दिखाई ही नहीं देती है, भाई लोग अमीरी के मज़े लूटते हैं तो बेचारी बहन सड़-सड़कर जी रही होती है। भाई अपनी पत्नी और बच्चे का गुलाम हो जाता है। तो वह बहन का कुछ अच्छा नहीं चाह सकता है। लेकिन भाईयों को चाहिए कि वे लोग बहन की सदा के लिए मदद करते रहें। दो भाईयों की एक बहन की शादी एक बहुत ही बड़े महल जैसे घर के बेटे से हुई। भाईयों ने सोचा कि बहन को अब जीवन भर पलटकर देखने की ज़रूरत ही नहीं है। मन में सोच रहे थे कि चलो हमारी पीड़ा तो चली गयी, तीस साल की हो गयी थी, कोई उस...