क्या धौनी की टीम में ज़रूरत है


क्या धौनी की टीम में ज़रूरत है, क्या धौनी को टीम से हटाना चाहिए, विराट कोहली लगभग सारे विश्व को हर फॉरमैट में जीत चुके हैं


वे धौनी से कहीं बेहतर कप्तान साबित हो चुके हैं, अब भारत को हराना सारी दुनिया के लिए बेहद मुश्किल होता चला जा रहा है, एकदम मक्खन की तरह हरेक जीत आसान सी लग रही है आज सबसे उबलता, दनदनाता, फडफडाता सवाल यही है कि क्या धोनी को टीम में रखा जाना चाहिए ना नहीं। सौ बात की एक बात जब तक भारतीय टीम जीत पर जीत पर जीत हासिल करती जा रही है, हमको विजयी कॉमबिनेशन को नहीं गडबड करके धौनी को हटाना नहीं चाहिए। धोनी हालाँकि बहुत धीमे खेल रहे हैं वह हर सिरीज़ में एक मैच तो जीताने में सफल हो रहे हैं, आपको याद होगा अॉसी के साथ सौ के ऊपर की साझेदारी भुवनेश्वर कुमार के साथ करके भारत को जीत दिलायी थी धौनी ने। वही मैच ऑसी के अरमानों का गला दबा गया, और उसी चमत्कारिक जीत के बाद ऑसी ने सारी सिरीज़ में घुटने टेक दिये थे। सो, धौनी पार्टनरशिप में जमे रहने के साथ-साथ विराट के तनाव को भी कम कर रहे हैं। इस समय बहुत सारा क्रिकेट होने की वजह से विराट कोहली को मैदान पर समझाने के लिए धोनी जैसे अनुभवी पुराने कप्तान की बेहद ज़रूरत होती है, उसमें धौनी पूरी तरह से कामयाब हो रहे हैं। धौनी और विराट की कप्तानी के गुर की जोडी जिस तरह से मैदान में धमाल मचा रही है, उससे तो यही लगता है कि धौनी को टीम से नहीं निकाला जाना चाहिए। टीम में धौनी जैसा एक शातिर दिमाग़ होना बेहद ज़रूरी होता है। आजकल एक बात आपने महसूस की होगी कि फील्ड जमाते वक्त कौनसा खिलाड़ी कौनसी जगह होना चाहिए यह समस्या पूरी तरह से कम हो गयी है, जिससे कैच कम से कम छूट रहे हैं, यह सब धौनी-विराट के शातिर दिमाग की वजह से ही हो पा रहा है। विराट ने धौनी के साथ मिलकर क्या-क्या हासिल नहीं किया है, यह किसी से छिपा नहीं है, हर विरोधी टीम भारत की धरती पर आकर भारत को धूल चटाने के लिए आती है, क्योंकि यहाँ पर मैदान पर तीस से पचास हज़ार लोगों का जो हुजूम ज़ोर ज़ोर से चिल्लाता है तो हर विरोधी खिलाड़ी को लगता है इन हज़ारों की बोलती बंद करने में बड़ा मज़ा आयेगा, विरोधी गेंदबाज़ को चौका या छक्का पड़ता है दर्शकों के पुकारे की वजह से उसके घमंड को चोट पहुँचती रहती है, वह पूरी जान लगाकर खेलता है, क्योंकि वह अच्छा खेलता है तो उसको आईपीएल में करोड़ों का दाम मिलता है, अब न्यूजीलैंड के मनरो को करोड़ों रुपये में आईपीएल में ख़रीदा जायेगा, उससे पहले इंग्लैंड के स्टोक्स को भी करोड़ों रुपये में ख़रीदा गया, सो, अब हरेक खिलाड़ी पूरी जान झोंककर भारत के साथ क्रिकेट खेल रहा है। सो, इतना होने के बाद भी भारत सभी से क्रिकेट जीतता चला जा रहा है, जीतता चला जा रहा है, तो इसमें लगातार तो चमत्कार नहीं हो सकता है, पूरी तरह से यह भारतीय खिलाडियों की मेहनत ही है जो हम सारी दुनिया पर हम राज कर रहे हैं। हिप हिप हुरें हम सारी दुनिया को बुरी तरह से हराकर हर तरह के खेल में जीतने की देहलीज पर खड़े हुए हैं, टेस्ट मैच में हमारे नज़दीक भी कोई नहीं फटक रहा है, क्रिकेट बुद्धिजीवी टेस्ट मैच को ही क्रिकेट का शीर्ष मानते हैं, इंग्लैंड और ऑसी में तो टेस्ट को रियल क्रिकेट टेस्ट कहा जाता है, सफेद कपड़ों में ही क्रिकेटर जेंटलमैन लगता है, यही धारणा आज भी बनी हुई है, और उस अति उत्तम खेल के हम बादशाह, शहंशाह, राजा, सरताज, जनाबे आली, हुक्मरान, बने हुए हैं, बाक़ी के देश तो ख़बीज़, चूहे, बिल्ली, चीटिंयाँ बनी हुई हैं, हम हरेक को मसल मसलकर रख रहे हैं। पहले तो भारत के हाल बहुत बुरे होते थे, अब तो विराट के लिए हर मंज़िल को छूना बहुत ही आराम का काम होता चला जा रहा है। आज की तारीख़ में भारत के चालीस, पैंतालीस, साठ, सत्तर साल के क्रिकेट प्रशंसकों ने भारतीय क्रिकेट का ऐसा सुनहरा दौर देखा ही नहीं था, सारे आज के बूढ़े लोग भारत को हर बार हारता हुआ ही देख रहे थे, भारत की टीम पहले कोठे की लौंडिया हो गयी थी, जो आता था, गुलाब के फूल को जैसे मसला जाता है, उसी तरह मसल-मसलकर हराकर चला जाता था, हमारी टीम टेस्ट में बुरा हाल था, फॉलोऑन के जूते पड़ने वाली टीम हो गयी थी, तब हम पिटते-पिटते थक जाते थे, पहले हमारी टीम लोटपोट के घसीटाराम के जैसे थी, हमें तब घसीटाराम टीम कहा जाता था, उसको बदला कपिल, गावस्कर, गांगुली, धौनी और अब अज़ीमो शान शहंशाह विराट कोहली ने। इसी बात पर एक गीत हो जाये--ऑधेरी रातों में सुनसान राहों पर हर जुल्म मिटाने को एक मसीहा निकलता है, जिसे लोग शहंशाह कहते हैं.ढाक चिक ढाक चिक ढाक चिक.जिओ विराट राजा जिओ, अनुष्का भाभीजी यही गीत गा रही है, विराट को लेकर.मेरा वाला डिंग डांग डिंग डांग करता है मुझे वॉट्स ये करता, तू यहाँ ये न जाना तू वहाँ ये न जाना मेरा वाला डिंग डांग करता है.सब की फोड़ डाली रे किस्मत हायरे ये क्या हो गया. अब तो विरोधी टीमें यही गीत गा रही है, इंग्लैंड गीत गा रही है, तलत महमूद का पुराना ढकलुस गीत - -ज़िंदगी देने वाले सुन, तेरी दुनिया से दिल भर गया, मैं यहाँ जीते जी मर गया आ आ.ऑसी टीम गीत गा रही है.दिल उल्लू का पद्धा है, जहाँ नहीं वहीं जाता है, दिल उल्लू का पढ़ा है, हमेशा जूते खाकर आता है, दिल उल्लू का पढ़ा है. विराट ने पिछले दो साल से जो क्रिकेट खेलकर दिखाई है वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। अब तो विराट कोहली का यह माजरा हो गया है कि वे कल को रिकी पांटिंग, स्टीव वॉ, स्टीव स्मिथ की कप्तानी की जीतों की बजा डालेंगे, उनको भी बहुत पीछे छोड़ सकते हैं। विराट अपनी कप्तानी से विरोधी टीम की छाती पर चढ़कर ऐसे बैठ जाते हैं कि विरोधी टीम को साँस तक नहीं लेने देते हैं। उनमें किल्लर स्टिंक्ट इतना बेहतरीन है कि सामने वाली टीम को छठी का दूध याद आ जाता है। उसे नानी याद आ जाती है, विराट के सामने सारी दुनिया की टीमें आज रहम की भीख माँग रही हैं कि कुछ तो छोड़ों हमारे लिए, भगवान के लिए एक टेस्ट या एक दिनी श्रृंखला हमें जीतने दो, कुछ तो जीत का परचम हम लेकर अपने देश जाना चाहते हैं, लेकिन विराट हरेक की इज्जत का फालूदा ही बनाते चले जा रहे हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि उनमें जीत की भूख दिन ब दिन बढ़ती ही चली जा रही है। अगर हम भारतीय टेस्ट टीम की बात करें तो चेतेश्वर पुजारा, अजिक्य रहाणे, के.एल. राहुल, शिखर धवन ऐसे बल्लेबाज़ हैं जो विरोधी टीम को धूल चटा रहे हैं, हमारे पास उमेश यादव, ईशांत शर्मा, अश्विन, जडेजा बेहतरीन टेस्ट के गेंदबाज़ हो गये हैं। इनकी प्रतिभा को बचाकर रखा जा रहा है। इनको ओवरएक्सपोज़ होने नहीं दिया जा रहा है, बात भी ठीक है क्योंकि आईपीएल में सभी खिलाड़ी खेलते हैं तो वे लोग दुनिया भर का पैसा कमा ले रहे हैं। तो उनको अपनी गेंदबाज़ी का सस्पेंस बचाकर रखना चाहिए। यही काम विराट कोहली कर रहे हैं। इधर एकदिनी मैचों में तो हमारी बहुत ही बल्ले बल्ले हो गयी है, अब लंका को हराना बहुत ही आसान है और नंबर एक पर जम जाना बायें हाथ का खेल हो चुका है। लंका को हम टी २० में हरा देंगे तो हम टी २० के भी बादशाह हो जाएँगे, तो फिर हमारा एक एक एक का सपना भी पूरा हो जायेगा। हमारा कहना है कि अप्रैल में नंबर वन टीम बनने का कट ऑफ़ टाइम होता है, तो तब तक हम हर तरह से सारी दुनिया को जीत चुके होंगे। अब हम पूरी तरह से दुनिया के बादशाह हो चुके हैं, हर तुर्रमखाँ को हमने धूल चटा दी है, आँसी की तो हमने ऐसी की तैसी करके उनको धूल चटा दी है, अब तो ऐसा लग रहा है कि उनका वजूद भी ख़तरे में लग रहा है। हमने कभी सोचा भी नहीं था कि भारतीय क्रिकेट की जीतें इतनी आसान हो जाएँगी। एकदम मक्खन की तरह हरेक जीत आसान सी लग रही है। कारण यह है कि टीम में खिलाडियों को जो बहुत ही समझदारी से बदला जा रहा है, वही इन जीतों का कारण बनता जा रहा है। अश्विन, रवींद्र जडेजा, शमी, के.एल. राहुल, उमेश यादव, इशांत शर्मा ये सारे के सारे अब एक दिनी और टी २० का हिस्सा नहीं रहे हैं, इनको इसलिए हटाया जा रहा है, सारी विपक्षी टीमें इनके वीडियोज़ गेंदबाज़ी और बल्लेबाज़ी में पहचान चुकी हैं, इसलिए इनको हटा दिया गया है। अब चहल, कुलदीप, अक्षर, बुमराह की सस्पेंस की गेंदबाज़ी करवायी जा रही है। कुलदीप का चयन जो रुक रुक कर किया जा रहा है, उसी से निर्णायक मैच हम जीत पा रहे हैं। भारतीय टीम का थिंक टैंक जो है वह भारतीय क्रिकेट इतिहास का अब तक का सबसे समझदार थिक टैंक कहा जा सकता है। अब भारतीय टीम को एक और तोहफ़ा दिया गया है कि उन्हें हवाई जहाज़ के इकोनॉमी क्लास से ऊपर उठाकर उन्हें बिजनेस क्लास में रखा जा रहा है, जिससे कि वे ज़रा आराम से बैठकर सोच समझ सकें। बाय बाय मिस गुडनाईट कल फिर मिलेंगे।

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